Kurukshetra | कुरुक्षेत्र | Jilewar Haryana | Haryana GK | HSSC | Download PDF

Kurukshetra | कुरुक्षेत्र | Jilewar Haryana | Haryana GK | HSSC | Download PDF

इस लेख में हम Kurukshetra | कुरुक्षेत्र से जुडी सभी बातें पढ़ेंगे जो कि HSSC Exams के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं|
इसमें उन सभी बातों पर ध्यान किया गया हैं जो कि HSSC द्वारा हर बार परीक्षा में पूछे जाते हैं | यह जिलवार हरियाणा है एक भाग हैं जिसमे हमने कुरुक्षेत्र के बारे में सभी बातें बतायी हैं | बाकी जिलों के बारें में पढ़ने के लिए आप हमारी website के Haryana GK section में अपनी जरूरत के हिसाब से हर चीज़ पढ़ सकते हैं|

इतिहास / History

  • कुरुक्षेत्र महाभारत युद्ध एवं श्रीमद्भगवद्गीता के जन्म स्थल के रूप में विशेष रुप से विख्यात है।
  • कुरक्षेत्र को “धर्म नगरी” भी कहा जाता है |
  • कुरुक्षेत्र का नाम राजा कुरु के नाम पर पड़ा था।
  • प्राचीन भारत में यह श्रीकंठ जनपद की राजधानी थी|
  • आईने अकबरी के अनुसार इस जगह का प्राचीन नाम थानेश्वर था।
  • वामन पुराण के अनुसार कुरुक्षेत्र को पांडव वन, सूर्य वन, आदित्य वन व शांति वन के नाम से भी जाना जाता था।
  • शक्तिशाली वर्धन वंश का उदय यही हुआ शक्तिशाली वर्धन वंश का उदय यही हुआ था।
  • 7 वीं शताब्दी में हर्षवर्धन ने थानेसर को अपनी राजधानी बनाया था।
  • हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री हेनसांग यहां पर आया था। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘सी-यू-की’ में थानेश्वर का वर्णन किया है। हेनसांग 635-644 ईसवी तक थानेश्वर में ही रहा था।

 

आधुनिक कुरुक्षेत्र / Modern Kurukshetra

स्थापना / Establishment  23 जनवरी, 1973
स्थिति / Location  हरियाणा के उत्तरी भाग में स्थित है| इसके उत्तर में अम्बाला, उत्तर-पूर्व में यमुनानगर, पश्चिम में कैथल और दक्षिण में करनाल जिला स्थित हैं|
क्षेत्रफल / Area 1, 530 वर्ग कि.मी. / 1,530 Sq. k.m.
घनत्व / Density 631 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर / 631 person per Sq. k.m.
लिंगानुपात / Sex Ratio 888
साक्षरता दर / Literacy Rate 76.31%
उपमंडल / Subdivision पेहोवा, थानेसर, लाडवा, शाहबाद
तहसील / Tehsil पेहोवा, थानेसर, शाहबाद
उपतहसील / Sub-Tehsil बबैन, लाडवा, इस्माइलाबाद
खंड / Division  बबैन, लाडवा, इस्माइलाबाद ,पेहोवा, शाहबाद, थानेसर, पीपली

Kurukshetra | कुरुक्षेत्र | Digital Gyan Ganga

महत्वपूर्ण स्थल / Important Places

भोरसैदा
  • यह जगह कुरुक्षेत्र से लगभग 13 किलोमीटर दूर मगरमच्छों की वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है।
ब्रह्मसरोवर
  • इसे कुरुक्षेत्र सरोवर भी कहते हैं।
  • इस सरोवर को राजा कुरु ने खुदवाया था।
  • अलबरूनी द्वारा लिखी गई किताब ‘उल हिंद’ में ब्रह्मसरोवर का वर्णन है।
  • 1850 में इसे थानेश्वर के जिलाधीश लऱकीन ने पुनः खुदवाया था।
  • मत्स्य पुराण के अनुसार थानेश्वर का ब्रह्मसरोवर तीनों लोकों का पुण्यदायक तीर्थ स्थल है।
ज्योतिसर सरोवर
  • मान्यता है कि महाभारत के समय इसी वटवृक्ष के नीचे श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था तथा अपना विराट रूप धारण करके दिखाया था।
कालेश्वर तीर्थ
  • जनश्रुति के अनुसार रामायण काल में यहां रुद्र की प्रतिष्ठा की गई थी।
  • पूराणोक्त 11 रुद्रों में से यह एक रूद्र है।
  • यहां भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है।
बिरला मंदिर
  • यह मंदिर कुरुक्षेत्र-पिहोवा मार्ग पर ब्रह्म सरोवर के समीप स्थित है।
  • इस मंदिर का निर्माण भी जुगल किशोर बिरला ने वर्ष 1955 में करवाया था|
  • ईस मंदिर की दीवारों पर गीता श्लोक लिखे गए हैं।
श्री कृष्ण संग्रहालय
  • श्री कृष्ण संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1991 में कुरुक्षेत्र में ही की गई थी।
सर्वेश्वर महादेव मंदिर
  • सर्वेश्वर महादेव का मंदिर ब्रह्मा सरोवर पर उत्तर की ओर एक टापू पर स्थित है।
  • इस मंदिर के चारों ओर जल भरा रहता है|
स्थानेश्वर महादेव मंदिर
  • पांडवों ने इसी स्थान पर भगवान शिव से प्रार्थना की थी और उनसे महाभारत के युद्ध में विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया था।
  • इस मंदिर का निर्माण पुष्यभूति ने करवाया था तथा इसका पुन:र्निर्माण सदाशिव मराठा ने करवाया था।
मार्कंडेश्वर देवी मंदिर, गुमटी
  • कुरुक्षेत्र के गांव गुमटी में 1953 में प्रकाशवती ने मार्कंडेश्वर देवी मंदिर की स्थापना की।
बाणगंगा
  • महाभारत में अर्जुन ने यहां पर बाण मारकर गंगा निकाली थी तथा जलधारा शर-शस्य पर लेटे भिषम पितामह के मुंह में पहुंची थी।
शेखचिल्ली का मकबरा
  •  यह मकबरा सूफी संत शेख चिल्ली का है, जो मुगल सम्राट शाहजहां के शासनकाल में ईरान से चलकर भारत में हजरत क़ुतुब अलाउद्दीन से मिलने थानेसर आए थे।
  • दुर्भाग्य से शेखचिल्ली की मृत्यु थानेसर में ही हो गई और उन्हें यहां दफना दिया गया। इसी कारण शेखचिल्ली के मकबरे को हरियाणा का ताजमहल भी कहा जाता है।
अपाया
  • यह अति प्राचीन तीर्थ स्थल अपाया नदी के तट पर स्थित है।
  • इस नदी में स्नान कर और माहेश्वर की पूजा करने से मनुष्य परमगति को प्राप्त करता है।
देवीकूप मंदिर
  • यह मंदिर भद्रकाली या सती को समर्पित है तथा भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है।
प्राची तीर्थ
  • मान्यता हैं कि इस स्थान पर तीन रात्रि तक रहकर व्रत करने से शरीर के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं।
लाडवा
  • यह नगर सिक्खों के घरानों का माना जाता है।
  • सिक्खों के प्रथम युद्ध के पश्चात ही अंग्रेजों ने इसे अपने अधिकार में ले लिया था।
  • कुरुक्षेत्र जिले की यह सबसे अधिक प्राचीन नगरपालिका है।
  • जिसकी स्थापना 1867 में की गई थी।
  • लाडवा का विद्रोह 1845 में हुआ जिसका नेतृत्व अजीत सिंह ने किया था।
सन्निहित तीर्थ
  • इसके बारे में मान्यता है कि यहां पर सात सरस्वती नदियां मिलती हैं।
  • सन्निहित सरोवर को भगवान विष्णु का स्थाई निवासी माना जाता है।
चंद्रकुप
  • महाभारत कालीन इस कुप का निर्माण युधिष्ठिर ने करवाया था।
कमोधा तीर्थ
  • कुरुक्षेत्र में स्थित इस वन का संबंध काम्यक वन से है।
  • पांडवों ने इसी वन में निवास किया था।
  • यहां कामेश्वर महादेव का ईटों का मंदिर तथा मठ है।
  • यहां ईटों का एक छोटा सा भंडार है जहां द्रौपदी ने पांडवों के लिए खाना बनाया था।
कुछ अन्य महत्वपूर्ण स्थल कमलनाथ तीर्थ, नकरकातारी तीर्थ, वाल्मीकि आश्रम, गुरुद्वारा नौवी बादशाही, गुरुद्वारा छठी बादशाही

अन्य महत्वपूर्ण बातें / Other Important Points

Kurukshetra Development Board / कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड:

स्वर्गीय श्री गुलजारीलाल नंदा के प्रयासों से 1 अगस्त 1968 को कुरुक्षेत्र मे तीर्थों के विकास कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की स्थापना भी कि गई। जिसके अध्यक्ष गुलजारीलाल नंदा थे और उपाध्यक्ष बंसीलाल थे।

International Gita Mahotsav, Kurukshetra:

  • कुरुक्षेत्र में सन 1989 में प्रथम बार “गीता जयंती उत्सव” मनाया गया।
  • वर्ष 1992 में “गीता जयंती समारोह” समिति का गठन किया गया|

 

मगरमच्छ प्रजनन केंद्र भौर-सैदा

छिलछिला वन्य जीव अभ्यारण कुरुक्षेत्र

ब्लैकबक प्रजनन केंद्र पीपली

कुरुक्षेत्र में आकाशवाणी केंद्र 27 जून 1991

Educational Institution in Kurukshetra / कुरुक्षेत्र में शैक्षिक संस्थान : 

जवाहर नवोदय विद्यालय – निवारसी

कुरुक्षेत्र विश्यविद्यालय, कुरुक्षेत्र : 11 जनवरी, 1956 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस विश्विद्यालय की नीव रखी|

 

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